Hum Katha Sunate Ram Sakal Gun Dhaam Ki Lyrics in hindi | Hum Katha Sunate Lyrics in Hindi | हम कथा सुनाते राम सकल गुणधाम की लिरिक्स | हम कथा सुनाते भजन
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Hum Katha Sunate Ram Sakal Gun Dhaam Ki |
HAM KATHA SUNATE mp3 song
Song Name – HAM KATHA SUNATE
Singer Name - Kavita Krishnamurthy , Hemlata & Ravindra Jain
Lyrics - Traditional
Song Duration – 14:56 min
Lyrics - Traditional
Song Duration – 14:56 min
Category - Ram Bhajan
Hum Katha Sunate Ram Sakal Gun Dhaam Ki Lyrics | हम कथा सुनाते Hum Katha Sunate Lyrics - Ramayan | Hum Katha Sunate Ram Sakal Gun Dhaam Ki Bhajan Lyrics
नमस्कार साथियो जय श्री राम | आज हम आपके लिए रामायण कृत '' राम कथा भजन '' एक मधुर लेकर आये हे | जिसमे प्रभु श्री राम जी की पूरी कथा वर्णित हे |
दृश्य उस समय का हे जब माता सीता अयोध्या पुन लौटकर आयी और बाद में वे गुरु विश्वामित्र के आश्रम पर रह रही थी | तब माता सीता के पुत्र लव और कुश श्री राम जी के दरबार में जाकर पूरी राम कथा का पाठ श्री राम के सम्मुख करते हे |
इस कथा रूपी भजन के बोल इतने मधुर हे की सुनने वाले की आँखों में आंसू आ जाते हे | इस भजन के लिरिक्स नीचे दिए गए हे | आप उन्हें पढ़े और आनंद ले | जय श्री राम |
Hum Katha Sunate Lyrics in Hindi | Lyrics हम कथा सुनाते राम सकल गुणधाम की hum katha sunaate | हम कथा सुनाते Hum Katha Sunate Hindi Lyrics
ॐ श्री उमामहेश्वराभ्याय नमः
वाल्मीकि गुरुदेव के पद पंकज सिर नाय |
सुमिरे मात सरस्वती हम पर होउ सहाय |
मात पिता के वंदना करते बारम्बार |
गुरुजन राजा प्रजाजन नमन करो स्वीकार |
हम कथा सुनाते राम सकल गुणधाम की | -2
ये रामायण है पुण्य कथा श्री राम की ।
जम्बू द्वीपे भरत खंडे आर्यावर्ते भारतवर्षे |
एक नगरी है विख्यात अयोध्या नाम की |
यही जन्म भूमि है परम पूज्य श्री राम की |
हम कथा सुनाते राम सकल गुणधाम की |
ये रामायण है पुण्य कथा श्री राम की | -2
रघुकुल के राजा धर्मात्मा, चक्रवर्ती दशरथ पुण्यात्मा |
संतति हेतु यज्ञ करवाया, धर्म यज्ञ का शुभ फल पाया |
नृप घर जन्मे चार कुमारा, रघुकुल दीप जगत आधारा |
चारों भ्रातों के शुभ नामा, भरत, शत्रुघ्न, लक्ष्मण रामा |
पूरण हुई शिक्षा, रघुवर पूरण काम की |
हम कथा सुनाते राम सकल गुणधाम की |
ये रामायण है पुण्य कथा श्री राम की |
मृदु स्वर कोमल भावना, रोचक प्रस्तुति ढंग |
एक एक कर वर्णन करें, लव कुश राम प्रसंग |
विश्वामित्र महामुनि राई, तिनके संग चले दो भाई |
कैसे राम ताड़िका मारी, कैसे नाथ अहिल्या तारी |
मुनिवर विश्वामित्र तब, संग ले लक्ष्मण राम |
सिया स्वयंवर देखने, पहुंचे मिथिला धाम |
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अपने वर का चयन करेगी सीता सुकुमारी |
जनकपुर उत्सव है भारी ।
जनक राज का कठिन प्रण, सुनो सुनो सब कोई |
जो तोड़े शिव धनुष को, सो सीता पति होई |
को तोरी शिव धनुष कठोर, सबकी दृष्टि राम की ओर |
राम विनय गुण के अवतार, गुरुवर की आज्ञा सिरधार |
सहज भाव से शिव धनु तोड़ा, जनकसुता संग नाता जोड़ा |
रघुवर जैसा और ना कोई, सीता की समता नही होई |
दोउ करे पराजित, कांति कोटि रति काम की |
हम कथा सुनाते राम सकल गुणधाम की |
ये रामायण है पुण्य कथा सियाराम की |
सब पर शब्द मोहिनी डारी, मन्त्र मुग्ध भये सब नर नारी |
यू दिन रैन जात हैं बीते, लव कुश ने सबके मन जीते |
लंका दहन, रावण मरण, अयोध्या पुनरागमन |
सविस्तार सब कथा सुनाई, राजा राम भये रघुराई |
राम राज आयो सुखदाई, सुख समृद्धि श्री घर घर आई |
काल चक्र ने घटनाक्रम में, ऐसा चक्र चलाया |
राम सिया के जीवन में फिर, घोर अधेरा छाया |
अवध में ऐसा, ऐसा इक दिन आया |
निष्कलंक सीता पे प्रजा ने, मिथ्या दोष लगाया |
अवध में ऐसा, ऐसा इक दिन आया ।
हम कथा सुनाते | लव कुश गीत lyrics | हम कथा सुनाते राम सकल गुणधाम singer | कथा सुनाते हैं | जनकपुर उत्सव है भारी |
चल दी सिया जब तोड़ कर, सब नेह नाते मोह के |
पाषाण हृदयों में, ना अंगारे जगे विद्रोह के |
ममतामयी माँओं के आँचल भी, सिमट कर रह गए |
गुरुदेव ज्ञान और नीति के, सागर भी घट कर रह गए |
मानवता को खो बैठे जब, सभ्य नगर के वासी |
तब सीता को हुआ सहायक, वन का इक सन्यासी |
उन ऋषि परम उदार का, वाल्मीकि शुभ नाम |
सीता को आश्रय दिया, ले आए निज धाम |
रघुकुल में कुलदीप जलाए, राम के दो सुत सिय ने जाए |
जनक दुलारी कुलवधू दशरथजी की |
राजरानी होके दिन वन में बिताती है |
रहते थे घेरे जिसे दास दासी आठों याम |
दासी बनी अपनी उदासी को छुपाती है |
धरम प्रवीना सती, परम कुलीना |
सब विधि दोष हीना जीना दुःख में सिखाती है |
जगमाता हरिप्रिया लक्ष्मी स्वरूपा सिया |
कूटती है धान, भोज स्वयं बनाती है |
कठिन कुल्हाडी लेके लकडियाँ काटती है |
करम लिखे को पर काट नही पाती है |
फूल भी उठाना भारी जिस सुकुमारी को था |
दुःख भरे जीवन का बोझ वो उठाती है |
अर्धांगिनी रघुवीर की वो धर धीर |
भरती है नीर, नीर नैन में न लाती है |
जिसकी प्रजा के अपवादों के कुचक्र में वो |
पीसती है चाकी स्वाभिमान को बचाती है |
पालती है बच्चों को वो कर्म योगिनी की भाँती |
स्वाभिमानी, स्वावलंबी, सबल बनाती है |
ऐसी सीता माता की परीक्षा लेते दुःख देते |
निठुर नियति को दया भी नही आती है |
उस दुखिया के राज दुलारे, हम ही सुत श्री राम तिहारे |
हे पितु भाग्य हमारे जागे, राम कथा कही राम के आगे |
पुनि पुनि कितनी हो कही सुनाई |
हिय की प्यास बुझत न बुझाई |
सीता राम चरित अतिपावन |
मधुर सरस अरु अति मनभावन |
हम कथा सुनाते राम सकल गुणधाम की,
ये रामायण है पुण्य कथा श्री राम की ।
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